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आदिनाथ भगवान की आरती | Adinath bhagwan ki aarti

भगवान आदिनाथ जी की आरती के २ वर्णन मुझे मिले है। मैंने दोनों वर्णनों को आपके समक्ष प्रस्तुत किया है।
 

आदिनाथ भगवान की आरती (वर्णन १):

जगमग जगमग आरती कीजै, आदिश्वर भगवान की ।
प्रथम देव अवतारी प्यारे, तीर्थंकर गुणवान की । जगमग०

अवधपुरी में जन्मे स्वामी, राजकुंवर वो प्यारे थे,
मरु माता बलिहार हुई, जगती के तुम उजियारे थे,
द्वार द्वार बजी बधाई, जय हो दयानिधान की ।। जगमग०

बड़े हुए तुम राजा बन गये, अवधपुरी हरषाई थी, (२)
भरत बाहुबली सुत मतवारे मंगल बेला आई ; थी, (२)
करें सभी मिल जय जयकारे, भारत पूत महान की । जगमग०

नश्वरता को देख प्रभुजी, तुमने दीक्षा धारी थी, (२)
देख तपस्या नाथ तुम्हारी, यह धरती बलिहारी थी ।
प्रथम देव तीर्थंकर की जय, महाबली बलवान की ।। जगमग०

बारापाटी में तुम प्रकटे, चादंखेड़ी मन भाई है,
जगह जगह के आवे यात्री, चरणन शीश झुकाई है ।
फैल रही जगती में नमजी महिमा उसके ध्यान की ।। जगमग०

आदिनाथ भगवान की आरती (वर्णन २):

जय जय आरती आदि जिणंदा, नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥

पहेली आरती पूजा कीजे, नरभव पामीने लाहो लीजे,
जय जय आरती आदि जिणंदा, नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥१॥

दूसरी आरती दीनदयाळा, धूलेवा मंडपमां जग अजवाळ्‌या,
जय जय आरती आदि जिणंदा, नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥२॥

तीसरी आरती त्रिभुवन देवा, सुर नर इंद्र करे तोरी सेवा,
जय जय आरती आदि जिणंदा, नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥३॥

चौथी आरती चउ गति चूरे, मनवांछित फल शिवसुख पूरे,
जय जय आरती आदि जिणंदा, नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥४॥

पंचमी आरती पुण्य उपाया, मूळचंदे ऋषभ गुण गाया,
जय जय आरती आदि जिणंदा, नाभिराया मरुदेवी को नन्दाः ॥५॥

Image source:

'Photo of lord adinath bhagwan at kundalpur' by Adarshj4, image compresses, is licensed under CC BY-SA 3.0

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