बाहुबली भगवान (जैन) आरती | Shree bhaubali bhagwan ki aarti

बाहुबली भगवन की आरती के २ वर्णन मुझे मिले है। अगर आपके पास इस से ज़्यादा वर्णन है, तो कृपया करके मुझसे साझा करे। 

बाहुबली भगवान की आरती: वर्णन १

जयति जय जय गोम्मटेश्वर, जयति जय बाहुबली ।
जयति जय भरताधिपति, विजयी अनुपम भुजबली ।

श्री आदिनाथ युगादिब्रह्मा त्रिजगपति विख्यात हैं ।
गुणमणि विभूषित आदिनाथ के भारत और बाहुबली ॥
जयति जय ००

वृषभेश जब तप वन चले तब न्याय नीति कर गए ।
साकेतनगरीपति भरत, पोदनपुरी बाहुबली ॥
जयति जय००

षटखंड जीता भरत मन की नहीं आशा बुझी ।
निज चक्ररत्न चला दिया फिर भी विजयी बाहुबली ॥
जयति जय००

सब आखिर राज्य विभव तजा, कैलाश पर जा बसे ।
इक वर्ष का ले योग तब, निश्चल हुए बाहुबली ॥
जयति जय००

तन से प्रभु निर्मम हुए वन जंतु क्रीडा कर रहे ।
सिद्धि रमा वरने चले प्रभु वीर बन बाहुबलि॥
जयति जय००

प्रभु बाहुबली की नग्न मुद्रा सीख यह सिखला रही ।
सब त्याग करके माधुरी तुम भी बनो बाहुबली ॥
जयति जय००

बाहुबली की आरती: वर्णन २ 

चंदा तू ला रे चंदनिया, सूरज तू ला रे किरणाँ … (२)
तारा सू जड़ी रे थारी आरती रे बाबा नैना सँवारूँ …(२)
थारी आरती … चंदा तू…॥

आदिनाथ का लाड़लाजी नंदा माँ का जाया …(२)
राजपाट ने ठोकर मारी, छोड़ी सारी माया … (२)
बन ग्या अहिंसाधारी, बाहुबली अवतारी
तारा सू जड़ी रे थारी आरती, रे बाबा नैना सँवारूँ … चंदा तू…॥

तन पे बेला चढ़ी नाथ के, केश घोंसला बन गया …(२)
अडिग हिमालय ठाड्या तनके, टीला-टीला चमक्या …(२)
थारी तपस्या भारी, तनमन सब थापे वारी
ताराँ सू जड़ी रे थारी आरती, रे बाबा नैना सँवारूँ … चंदा तू…॥

जय-जय जयकारा गावें थारा, सारा ये संसारी …(२)
मुक्ति को मार्ग बतलायो, घंण-घंण ए अवतारी …(२)
‘नेमजी’ चरणों में आयो, चरणाँ में शीश झुकायो
जुग-जुग उतारे थारी आरती रे, रे बाबा नैना सँवारूँ।

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'BahubaliBhagwan-1.jpg' by Amitjain80, Image compressed, is licensed under CC BY-SA 3.0