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श्री मुनिसुव्रतनाथ जी चालीसा | Shree Munisuvratnathji Chalisa

 
दोहा: 
अरिहंत सिद्ध आचार्य को करूँ प्रणाम ।
उपाध्याय सर्व-साधू करते स्व-पर-कल्याण ।।
जिनधर्म जिनागम जिनमंदिर पवित्र-धाम ।
वीतराग की प्रतिमा को कोटि-कोटि प्रणाम ।।

चौपाई:
जय मुनिसुव्रत दया के सागर, नाम प्रभू का लोक-उजागर ।
सुमित्रा राजा के तुम नंदा, माँ शामा की आँखों के चंदा ।।१।।

श्यामवर्ण-मूरत प्रभू की प्यारी, गुणगान करें निश-दिन नर-नारी ।
मुनिसुव्रत-जिन हो अंतरयामी, श्रद्धा-भाव-सहित तुम्हें प्रणामी ।।२।।

भक्ति आपकी जो निश-दिन करता, पाप-ताप भय-संकट हरता ।
प्रभु संकटमोचन नाम तुम्हारा, दीन-दु:खी जीवों का सहारा ।।३।।

कोई दरिद्री या तन का रोगी, प्रभु दर्शन से होते हैं निरोगी ।
मिथ्या-तिमिर भयो अतिभारी, भव-भव की बाधा हरो हमारी ।।४।।

यह संसार महादु:खदाई, सुख नहीं यहाँ दु:ख की खाई ।
मोह-जाल में फंसा है बंदा, काटो प्रभु भव भव का फंदा ।।५।।

रोग-शोक-भय-व्याधि मिटावो, भवसागर से पार लगावो ।
घिरा कर्म से चौरासी भटका, मोह-माया-बंधन में अटका ।।६।।

संयोग-वियोग भव-भव का नाता, राग-द्वेष जग में भटकाता ।
हित-मित-प्रिय प्रभु की वाणी, स्व-पर-कल्याण करें मुनि ध्यानी ।।७।।

भवसागर बीच नाव हमारी, प्रभु पार करो यह विरद तिहारी ।
मन-विवेक मेरा अब जागा, प्रभु-दर्शन से कर्म-मल भागा ।।८।।

नाम आपका जपे जो भाई, लोकालोक सुख-सम्पदा पाई ।
कृपा-दृष्टि जब आपकी होवे, धन-आरोग्य सुख-समृधि पावे ।।९।।

प्रभु-चरणन में जो जो आवे, श्रद्धा-भक्ति फल-वाँछित पावे ।
प्रभु आपका चमत्कार है न्यारा, संकटमोचन प्रभु नाम तुम्हारा ।।१०।।

सर्वज्ञ अनंत-चतुष्टय के धारी, मन-वच-तन वंदना हमारी ।
सम्मेद-शिखर से मोक्ष सिधारे, उद्धार करो मैं शरण तिहारे ।।११।।

महाराष्ट्र का पैठण-तीर्थ, सुप्रसिद्ध यह अतिशय-क्षेत्र ।
मनोज्ञ-मंदिर बना है भारी, वीतराग की प्रतिमा सुखकारी ।।१२।।

चतुर्थ-कालीन मूर्ति है निराली, मुनिसुव्रत प्रभु की छवि है प्यारी ।
मानस्तंभ उत्तंग की शोभा न्यारी, देखत गलत मान-कषाय भारी ।।१३।।

मुनिसुव्रत शनिग्रह-अधिष्ठाता, दु:ख-संकट हरे देवे सुख-साता ।
शनि-अमावस की महिमा भारी, दूर-दूर से आते नर-नारी ।

मुनिसुव्रत-दर्शन महा-हितकारी, मन-वच-तन वंदना हमारी ।।१४।।

चौबोला:
सम्यक् श्रद्धा से चालीसा, चालीस दिन पढिये नर-नार ।
मुक्ति-पथ के राही बन, भक्ति से होवे भव-पार ।।

Image source:
'Shri 1008 Munisuvratnath Bhagwan Statue' by Drsushrutshah, image compressed, is licensed under CC BY-SA 3.0

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