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श्री कुबेरजी की आरती | Shree Kuberji ki aarti

श्री कुबेरजी की आरती के २ वर्णन है। मैंने दोनों वर्णनों को आपके समक्ष प्रस्तुत किया है।

आरती कुबेर जी की (वर्णन १): ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे ... | Aarti Kuber ji ki (Version 1): Om jai yaksha kuber hare ...

ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे,
स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे ।
शरण पड़े भगतों के,
भण्डार कुबेर भरे ।
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...॥

शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,
स्वामी भक्त कुबेर बड़े ।
दैत्य दानव मानव से,
कई-कई युद्ध लड़े ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...॥

स्वर्ण सिंहासन बैठे,
सिर पर छत्र फिरे,
स्वामी सिर पर छत्र फिरे ।
योगिनी मंगल गावैं,
सब जय जय कार करैं ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...॥

गदा त्रिशूल हाथ में,
शस्त्र बहुत धरे,
स्वामी शस्त्र बहुत धरे ।
दुख भय संकट मोचन,
धनुष टंकार करें ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...॥

भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,
स्वामी व्यंजन बहुत बने ।
मोहन भोग लगावैं,
साथ में उड़द चने ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...॥

बल बुद्धि विद्या दाता,
हम तेरी शरण पड़े,
स्वामी हम तेरी शरण पड़े ।
अपने भक्त जनों के,
सारे काम संवारे ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...॥

मुकुट मणी की शोभा,
मोतियन हार गले,
स्वामी मोतियन हार गले ।
अगर कपूर की बाती,
घी की जोत जले ॥
॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे...॥

यक्ष कुबेर जी की आरती,
जो कोई नर गावे,
स्वामी जो कोई नर गावे ।
कहत प्रेमपाल स्वामी,
मनवांछित फल पावे ॥

॥ इति श्री कुबेर आरती ॥

आरती कुबेर जी की (वर्णन २): जय कुबेर स्वामी ... | Aarti Kuber ji ki (Version 2): Jai Kuber Swami ...

जय कुबेर स्वामी,
प्रभु जय कुबेर स्वामी,
हे समरथ परिपूरन ।
हे समरथ परिपूरन ।
हे अन्तर्यामी ॥
ॐ जय कुबेर स्वामी
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

जय कुबेर स्वामी,
प्रभु जय कुबेर स्वामी,
हे समरथ परिपूरन । (x2)
हे अन्तर्यामी ।
॥ ॐ जय कुबेर स्वामी..॥
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

विश्रवा के लाल इदविदा के प्यारे,
माँ इदविदा के प्यारे,
कावेरी के नाथ हो । (x2)
शिवजी के दुलारे ।
॥ ॐ जय कुबेर स्वामी..॥
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

मनिग्रवी मीनाक्षी देवी,
नलकुबेर के तात,
प्रभु नलकुबेर के तात
देवलोक में जागृत । (x2)
आप ही हो साक्षात ।
॥ ॐ जय कुबेर स्वामी..॥
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

रेवा नर्मदा तट
शोभा अतिभारी
प्रभु शोभा अतिभारी
करनाली में विराजत । (x2)
भोले भंडारी ।
॥ ॐ जय कुबेर स्वामी..॥
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

वंध्या पूत्र रतन और
निर्धन धन पाये
सब निर्धन धन पाये
मनवांछित फल देते । (x2)
जो मन से ध्याये ।
॥ ॐ जय कुबेर स्वामी..॥
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

सकल जगत में तुम ही
सब के सुखदाता
प्रभु सब के सुखदाता
दास जयंत कर वन्दे । (x2)
जाये बलिहारी ।
॥ ॐ जय कुबेर स्वामी..॥
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

जय कुबेर स्वामी,
प्रभु जय कुबेर स्वामी,
हे समरथ परिपूरन ।
हे समरथ परिपूरन ।
हे अन्तर्यामी ॥
ॐ जय कुबेर स्वामी
प्रभु जय कुबेर स्वामी..

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